Wednesday, October 28, 2009

भैंस चालीसा

मेरे एक चाचा ,बोले तो ताऊ, पुणे में रहते है नाम है राहुल , कंप्यूटर का कोर्स कर रहे है , डी वाई कॉलेज ऑफ़ इन्जीनीरिंग पुणे से . उन्होंने पापा के ओरकुट अकाउंट पर एक स्क्रैप भेजा है. स्क्रैप है भैंस चालीसा. ताऊ से मिलना हो तो यहाँ जाए . भैंस-वैस के बारे में मै तो कुछ नहीं जानता , वैसे उनका भैंस चालीसा ,बिना उनकी अनुमती के , मै आपके लिए पोस्ट कर रहा हूँ.

महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते
So now you can decide
अक्ल बङी या भैंस









ताऊ के साथ मेरी एक तस्वीर

1 comments:

अजय कुमार झा said...

बहुत खूब जतना सुंदर तस्वीर है ओतना ही सुंदर कविता है भाई ..माधव जी महाराज

 
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