Monday, October 19, 2009

हाथी मेरा साथी

दिवाली के दिन मेरे कालोनी में हाथी आया . हाथी को देखकर मेरा मन डोलने लगा , कुछ बच्चे सवारी कर रहे थे , एक राउंड का २० रुपयें लग रहे था . पापा ने मुझे भी हाथी पर बैठा दिया , हाथी पर बैठते ही मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी , बहुत डर लगने लगा और रोने लगा , रोने की तीव्रता बढ़ने पर पापा ने मुझे उतरवा दिया . वहीं पर बहुत सारे बच्चें हाथी की सवारी कर रहे थे,पर मै तो हाथी देख कर ही खुश था.

हाथी मेरा साथी , पर दूर से ही !











1 comments:

मुकेश कुमार मिश्र said...

वाह..... क्या बात है....

 
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