Monday, October 26, 2009

छठ पूजा


छठ पूजा के दिन शाम को मम्मी पापा को छठ पूजा घाट पर ले जाने का जिद करने लगी , पापा तुंरत राजी हो गए , मेरी तो मौज हो गयी , सुबह में भी पापा और मामा के साथ सीता राम दीवान चन्द , छोले भठूरे की दूकान पहाड़गंज, का भ्रमण किया था और अभी शाम में भी घुमने का सुनहरा मौका मिल रहा था. तुंरत पापा मम्मी के साथ वजीराबाद के यमुना घाट पर पहुच गया . घाट पर छठ व्रतियों की काफी भीड़ थी . कुछ व्रती लेटकर घाट पर जा रहे थे , अजीब श्रद्धा थी लोगों में . मै काफी खुश था वहा जाकर , तभी कुछ बच्चों ने पटाखे फोड़ने शुरू किये और मेरी हालत खराब हो गई . आपको तो पता ही होगा मै पटाखों से कितना डरता हूँ . खैर उसके बाद छठ पूजा घाट पर मेरा वक्त डरा सहमा हुआ ही बीता , रह रह कर पटाखे फुट रहे थे . पापा बता रहे थे की आज से दस साल पहले छठ पूजा घाट पर पटाखों का बिलकुल रिवाज नहीं था , वो तो इन दिनों बच्चों ने शुरू किया है . मेरा मानना है की छठ पूजा बहुत ही त्याग और श्रद्धा का पर्व है और इसमें पटाखों का क्या काम ? पर मेरी कौन सुनने वाला है. छठ पूजा घाट के बाद हम कमला नगर मार्केट पहुचे , कोल्हापुर रोड से मम्मी ने मुझे दो टी शर्ट खरीदी . उसके बाद पापा हमें उडुपी रेस्टोरेंट में ले गए . वहां पहुचते ही मुझे नीद आ गयी और मै पापा की गोंद में ही सो गया . जब घर आया तो मेरी नींद खुली , पता चला की मम्मी पापा ने ढोसा और चोवमीन खाया था .तो इस तरह आज की सुबह और शाम दोनों अच्छी रही .







लेटकर छठ पूजा घाट जाता एक व्रती





वजीराबाद पुल , दिल्ली

2 comments:

Jandunia said...

छठ पूजा पर आपका ये प्रयास साधुवाद के पात्र है। सबको छठ की शुभकामनाएं

Udan Tashtari said...

सही है, अच्छी तस्वीरें.

 
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