Friday, October 30, 2009

किचेन में कोहराम


जब मम्मी किचेन में होती है पहुच जाता हूँ उनकी हेल्प करने , आलू निकाल कर देता हूँ , प्याज देता हूँ , मिक्स़र चलाने में मदद करता हूँ , पहले जब मिक्स़र चलता था और आवाज होती थी तो डर जाता था अब डर नहीं लगता है ,अब तो मिक्स़र का स्विच भी दबाता हूँ .फ्रीज खोलता हूँ , डस्टबीन का ढक्कन खोलता हूँ , मतलब की खूब परेशान करता हूँ और इससे काम में देर होती है . इस दौरान पापा या तो टी वी देख रहे होते है या कंप्यूटर पर होते है , मम्मी पापा से लड़ती है , कहती है "कभी तो बच्चे को संभाल लीजिए ". पापा कुछ नहीं बोलते बस मुस्करा देते है और मुझे अपने पास रख लेते है , थोड़ी देर मुझे प्यार करते है और खिलाते है और फिर टी वी / कंप्यूटर में लग जाते है और मै सरक कर किचेन में मम्मी के पास पहुच जाता हूँ . मम्मी फिर पापा पर शुरू हो जाती है वगैरह ..वगैरह ...............

1 comments:

संगीता पुरी said...

इतनी शैतानी नहीं करते !!

 
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