Friday, May 21, 2010

माधव : डी देस्ट्रोयर( the Destroyer)

ये कोई साउथ इंडियन फिल्म का टाइटल नहीं है , इस हफ्ते मै वास्तव में Destroyer बन गया हूँ. मैंने इस पुरे हफ्ते तीन चीजों पर अपना हाथ आजमाया और वे तीनो चीजे अब खराब हो चुकी है .

पहली चीज : मेरा पहला शिकार रहा , मम्मी का मोबाइल . ये मोबाइल पापा ने तीन साल पहले मम्मी को गिफ्ट की थी. मैंने खेल खेल में वो मोबाइल पानी से भरी हुई बाल्टी में डाल दी , पाच मिनट बाद पापा मुझे देखने आये तो मोबाइल पानी में गोते लगा रहा था . , damage control के तहत बैटरी निकाल दी गयी पर जनाब स्वर्ग सिधार चुके थे.

दुसरी चीज : मेरा दुसरा शिकार रहा , कैनन पॉवर शोट डिजिटल कैमरा . मैंने एक हाथ मारा , कैमरा पापा के हाथ से छुट कर सीधे जमीन पर आ गिरा , कैमरे की लेंस निकली हुई थी सो कैमरा लेंस के बल ही जमीन से टकराया , लेंस टूट गया और कैमरा ने काम करना बंद कर दिया है .कैनन(Canon) का ये कैमरा दिल्ली में बनता भी नहीं है , इसका सेर्विस सेंटर गुडगाँव में है . कम्पनी वाले भी कम नहीं है , कैमरा जयादा दिल्ली में बिकता है पर सेर्विस सेंटर गुडगाँव में रखा है .

तीसरी चीज : हमारा एल सी डी भी खराब हो गया है , इसमें मेरा कोई दोष नहीं है पर पापा मेरा नाम इसमें भी घसीट रहे है .

अब गलतियां की है तो सजा तो मिलेगी , तो पापा ने मुझे कान पकड़ पर उठक बैठक कराया , मुझे सीखाने के लिए पहले खुद भी उठक बैठक की . कान पकड़कर उठक बैठक मुझे करने में बहुत मजा आया




अगले कुछ दिनों में कम्पूटर का नंबर आ सकता है .

14 comments:

डॉ टी एस दराल said...

अच्छे बच्चे भी शरारत करते हैं । अब इसमें गलती आपकी थोड़े ही है । वो तो मम्मी पापा ने ही ध्यान नहीं रखा अपनी चीज़ों का ।
चलो उठक बैठक से अभी से पहलवानी शुरू।

Nitish Raj said...

हा हा हा.. पहले मोबाइल फिर केनन का कैमरा जिसका लैंस दिल्ली में नहीं बनता और फिर जानबूझकर एलसीडी में नाम घसीटा जा रहा है...भई ये तो नाइंसाफी है ऊपर से उठक बैठक....ये ही तो अभी इनकी पूंजी है जो हमेशा हमारे पास बाद में दोगुना होके मिलेगी...। खूब।

Udan Tashtari said...

अरे बाप रे, इत्ता पनिशमेन्ट--इत्ते प्यारे बच्चे को.

alka sarwat said...

शाबाश बेटा !!यूं ही तरक्की करोगे
वैसे थोडा ज्यादा उठक बैठक करो नहीं तो किसी और को तुम्हें उठाना बैठाना पडेगा

बालवृंद said...

अगर यादास्त ठीक रही तो ये सज़ा हमेशा सही राह पर ही रखेगा।

नीरज जाट जी said...

बेटा, अगर मेरा बापू भी ब्लॉग लिखता तो यही लिखता
नीरज: डी देस्ट्रोयर

माधव said...

@ डॉ टी एस दराल

thnx for the support

माधव said...

@नीरज जाट जी

thnx for similar character

Roshani said...

koi baat nahin Madhav.bacche aisa karke hi sikhte hain.
aur har punishment ko enjoy karo...
:)

KK Yadava said...

मैंने इस पुरे हफ्ते तीन चीजों पर अपना हाथ आजमाया और वे तीनो चीजे अब खराब हो चुकी है ....पापा से कहो जल्दी से इन्हें सही कराएँ , तभी तो फिर से इन पर हाथ आजमा पाओगे.

आमीन said...

thanks madhav ji
aamin

संजय भास्कर said...

...bahutkhob

abhi said...

पनिशमेन्ट में भी कितना ज्यादा क्यूट लग रहा है हमारा माधव :)

संगीता पुरी said...

बेटे इतनी शरारत भी मत किया करो !!

 
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