पिछले शनिवार को दिल्ली में बाढ आई थी . यमुना खतरे के निशाँ से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही थी. शनिवार( 11 September,2010) को छुट्टी के चलते पापा घर पर ही थे . मुझे कफ की शिकायत थी , नाक से पानी आ रहा था , चिडचिडा सा हो गया था . दोपहर होते होते घूमने के लिए रोने लगा , तब पापा मुझे यमुना जी( चंदगी राम अखाड़े के पास ) के किनारे ले गए . यमुना में बाढ आयी हुई थी , जब मै यमुना तट पर पहुंचा, यमुना अपने अधिकतम लेवल पर थी ( 206.70 Metre), ये काँटा २०७ को छूने वाला ही थी .बाईस साल पहले यमुना इसी लेवल पर थी तब बाढ आया था . मैंने यमुनाजी में कुछ पत्थर -कंकण मारे और घर आ गया , पर मेरे जाने के कुछ देर बाद पानी कम होने लगा और शाम तक टी वी पर आने लगा की पानी कम होने लगा था .
कविता :- प्रयास करो तो ऐसा
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*कविता :- प्रयास करो तो ऐसा *
प्रयास करो, प्रयास करो....
जिन्दगी के लिए प्रयास करो,
कुछ करने के लिए प्रयास करो....
जिन्दगी में सुधर करने का, प्रयास करो,
कि...














11 comments:
अरे वाह गंजे यमुना जी के दर्शन करवा दिये तुने तो
thanks for joining my blog.
badhi hui yamuna jee kedarshan karane ke lie dhanyvad
इस पोस्ट की चर्चा यहाँ है -
रिमझिम का प्यारा दोस्त कौन है? : सरस चर्चा (13)
bahut acchi post...aapki nazar se ye drashya hamane bhi dekha.
main nanhi blogger
अनुष्का
अच्छी प्रस्तुति,
यहाँ भी पधारें :-
अकेला कलम...
बढ़ से बचकर रहना माधव.....
bahut badhiya...keep it up
achhi post maadhav.... aapke zariye hame bhi sthiti ka pata chala....
बेटे लाल पहचान में भी नहीं आ रहा...
अब क्या हाल है... बाढ़ का और जुकाम का?
@ Ranjan
बाढ और जुकाम दोनों उतर गए
mujhe lagta hai aapko dekhkar baadh sharmaa gai hogi.....badhiya post.
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