Tuesday, September 14, 2010

हिन्दी है हम, हिन्दी दिवस पर सभी ब्लोगर्स को मेरी शुभकामनायें

कहते है बच्चा अपनी माँ की भाषा के सबसे करीब होता है और मै कोई अपवाद नहीं हूँ . अभी मै केवल हिन्दी ही समझता और बोलता हूँ .हिन्दी के जरिये ही पापा ब्लॉग के जरिये मेरी बाते आभासी दुनिया को बताते है . हिन्दी ब्लोगिंग के जरिये ही मेरा ब्लॉग ६० देसो में पढ़ा जाता है .हिन्दी के जरिये ही मै कई लोगो से जुड़ा हूँ. मै तो अभी केवल हिन्दी में ही बात करता हूँ, मुझे हिन्दी पर अभिमान है .
भाषाओं के उद्यान में हिन्दी ऐसा पुष्प है जो माधुर्य, सौंदर्य और सुगंध से भरपूर है। माधुर्य के कारण हिन्दी मिष्ट है। सौंदर्य के कारण हिन्दी शिष्ट है। सुगंध के कारण हिन्दी विशिष्ट है। माधुर्य, हिन्दी का शिवम्‌ है। सौंदर्य, हिन्दी का सुंदरम्‌ है। सुगंध, हिन्दी का सत्यम्‌ है।







4 comments:

JHAROKHA said...

भाषाओं के उद्यान में हिन्दी ऐसा पुष्प है जो माधुर्य, सौंदर्य और सुगंध से भरपूर है। माधुर्य के कारण हिन्दी मिष्ट है। सौंदर्य के कारण हिन्दी शिष्ट है। सुगंध के कारण हिन्दी विशिष्ट है। माधुर्य, हिन्दी का शिवम्‌ है। सौंदर्य, हिन्दी का सुंदरम्‌ है। सुगंध, हिन्दी का सत्यम्‌
है.
bahut hi sahi baat kahi hai ie post me.
pyare -pyare madhav ko dher sara pyar avam badhai .
poonam aunty

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर बात लिखी माधब बेटा, हिन्दी हमारी पहचान है, जब कभी आया तो जरुर बताऊंगा

कविता रावत said...

..हिंदी के प्रति हमारा लगाव होना ही चाहिए. आप हिंदी को सच में अंगीकार कर नाम कमाओ यही कामना है ....इन्टरनेट पर हिंदी का प्रचार-प्रसार देखकर सचमुच सुखद अनुभूति होती है... भले ही हिंदी को आज कतिपय लोग सिर्फ बोलचाल की भाषा तक सीमित समझते है, और काफी हद तक यह बात सही भी है लेकिन हिंदी को हम भारतीय जितने सहजता और आत्मीयता से बोल, समझते है उतनी दूसरी भाषा को नहीं...
गणेशोत्सव और हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामना

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, हिंदी ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

 
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