Monday, November 8, 2010

घर से रेलवे स्टेसन और फिर वापस( सफर नहीं SUFFER)

६ नवंबर की पोस्ट में मैंने लिखा था की हम सब दिल्ली से आरा जा रहे है . सब कुछ ठीक ठाक था सही समय पर हम नई दिल्ली स्टेसन के लिए निकले और प्लेटफोर्म नंबर सात पर ट्रेन का इंतेजार करने लगे . ट्रेन आई पर उसमे AC-II कोच लगा ही नहीं था . रेलवे की इस बदइंतजामी की वजह से हमें ट्रेन छोडनी पडी और घर वापस आना पड़ा . इससे जयादा बुरा कुछ नहीं हो सकता था . आरा जाने की खुशी काफूर हो गयी . भारतीय रेल की ऐसी बदइंतजामी हमने पहली बार देखी . अब टिकट दलालो के जरिये टिकट लेने का इन्तेजाम हो रहा है , शायद बात बन जाए तो फिर आरा जा पाए . पर भारतीय रेल वाह रे वाह ...........................

4 comments:

रंजन said...

अफसोस दोस्त...

sada said...

बहुत खेदपूर्ण है यह तो ।

यश(वन्त) said...

बहुत बुरा लगा ये जान कर...

नीरज जाट जी said...

अरे तेरी का।
स्लीपर के फालतू डिब्बे लगने का मामला तो मैंने सुना है लेकिन कम डिब्बे लगना तो वाकई खिलवाड है। वैसे एक बार यह भी बता देते कि ट्रेन कौन सी थी। टिकट कहां से लिया था?
हो सकता है कि आपने दलाल से टिकट लिया हो और दलाल हमेशा पैसे बनाने के पीछे लगे रहते हैं। जिस ट्रेन में सेकंड AC ना हो, उसका टिकट बनाना उनके लिये मुश्किल काम नहीं है।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि स्टेशन स्टाफ काम की सुविधा के लिये ट्रेन के डिब्बों को अलग-अलग कर देते हैं जैसे कि स्लीपर के डिब्बे अलग, AC के अलग। फिर AC के डिब्बों में मेंटेनेंस की भी ज्यादा जरुरत होती है। हो सकता है कि वे डिब्बे कहीं वर्कशॉप में ले जाये गये हों। इस केस में ट्रेन के सभी डिब्बों को एक साथ ही प्लेटफार्म पर लाना सम्भव नहीं हो पाता। उन्होनें स्लीपर के डिब्बे प्लेटफार्म पर लगा दिये होंगे और AC डिब्बों को लाने चले गये होंगे। इस दौरान आपने सोचा या किसी ने बताया होगा कि इसमें AC नहीं है। बस, यही सोचकर रेलवे को कोसते हुए घर वापस आ गये होंगे।
अगर ऐसा नहीं है और गाडी सेकंड AC की सीटों के बावजूद भी बिना सेकंड AC के चली गयी होगी तो बहुत शर्मनाक बात है।

 
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