Wednesday, November 3, 2010

सुबह का आगाज , अखबार के साथ

पापा अपनी सुबह की शुरुआत चाय की चुस्की और अखबार के साथ करते है . मै चाय नहीं पीता हूँ क्योकि ये गम ( मै गर्म को गम बोलता हूँ ) होता है . बहुत पहले एक बार चाय के कप में हाथ डाल दिया था , हाथ जल गया था , तभी से चाय के कप से हमेशा दूर रहता हूँ.
अब मै चाय नहीं पी सकता तो क्या हुआ ,पर अखबार के पन्ने तो पलट ही सकता हूँ . आज सुबह उठ कर अखबार उठाया और अखबार से सारे पन्ने एक एक कर पलट डाले, किसी पढ़ाकू की तरह !







7 comments:

संजय भास्कर said...

AAP BHI AKHBAR PADHTE HO...
ABHI SE.
BAHI BAHUT KHOOB........
HUME AAJ KI TAAJA KHABRE BATA DO BAHI........

संजय भास्कर said...

VAISE AKHBAR PADHTE HUYE MAST LAGA RAHE HAI........... JNAAB

कविता रावत said...

Wah achhi aadat hai... kuch n kuch gyan to milta hi hai..
Deepawali kee haardik shubhkamnayne

Vijai Mathur said...

चाय नहीं पीते और अखबार पढ़ते हो हो ये अच्छी बात है.तुम्हारे यशवंत अंकल को भी मैंने बचपन से से ही अखबार पढना सिखा दिया था.

आप सब को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
हम आप सब के मानसिक -शारीरिक स्वास्थ्य की खुशहाली की कामना करते हैं.

यश(वन्त) said...

वाह भई वाह तो साब जी अखबार ही पढोगे तो पटाखे कौन छुडायेगा...:)

दिवाली मुबारक हो...और हाँ पापा-मम्मी और घर में सब को भी कह देना...मेरी और से :)

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, माधव,

रंजन said...

क्या खबर हे दोस्त..

प्यार..

 
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