Monday, November 1, 2010

मेरा हेलीकोप्टर


मेरा दोस्त नमन पिछले दिनों अपने नानी के घर गया था, जहा से वो हेलीकोप्टर लाया था . वैसे तो मेरे पास भी एरो प्लेन है पर उसका हेलीकोप्टर मुझे बहुत पसंद आया और मैंने मम्मी पापा से वैसा ही हेलीकोप्टर खरादने को कहा . अगले दिन मम्मी पापा मुझे लेकर बाज़ार गए और मेरे लिए हेलीकोप्टर खरीदा . आज कल वो हेलीकोप्टर मेरा सबसे अजीज खिलौना बना हुआ है . सुबह उठने से लेकर रात सोने तक हेलीकोप्टर मेरे हाथ में ही होता है .
रात में मै उसे भी सुलाता हूँ अपने पास .






8 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

देख के माधव, कहीं तुम्‍हें न उड़ा ले जाए
....


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मन की गति से चलें...
बूझो मेरे भाई, वृक्ष पहेली आई।

रंजन said...

दोनों चलते है...

Chinmayee said...

बहुत सुन्दर ....

राज भाटिय़ा said...

माधब यार तु अपना पलेन ले कर मेरे पास आ जा फ़िर दोनो भारत आयेगे, दिल्ली से तेरे हेलि कोप्टर पर रोहतक जायेगे फ़िर मोजां ही मोजां

यश(वन्त) said...

तो बच्चू लाल अब हेलिकॉप्टर में उड़ोगे.
हमें भी अपने साथ आसमान की सैर करा लाना:)

क्यों.. क्या ख्याल है?.....:):)

संजय भास्कर said...

kya baat hai madav akele akele
main bhi hoon yaar apke sath........

संजय भास्कर said...

hume bhi yaar apne sath le lo

नीरज जाट जी said...

तोड दिया होगा अब तक तो।

 
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