पापा के दोस्त संजीव अंकल जो हमारे पड़ोसी है , दशहरे की छुट्टी के समय पापा को लाहुल -स्पीती ( हिमाचल प्रदेश ) चलने के लिए कह रहे थे . लंबा प्रोग्राम और पारिवारिक कारणों से पापा नहीं जा सके . कल संजीव अंकल स्पीती से घूम कर आ गये . स्पीति की तसवीरें देखकर पापा हैरान रह गये . स्पिति हिमाचल परदेश का एक जिला है जो छह महीने बर्फ के चलते देश से कटा होता है . काजा शहर स्पीती का केंद्र है जो ४००० मीटर की उचाई पर स्पीति नदी के तट पर बसा हुआ है . बौद्ध मोनास्ट्री से भरा हुआ ये क्षेत्र बहुत सुंदर है . काजा मनाली से लगभग २०० कि मी की दूरी पर है . मनाली से सुबह में एक बस काजा के लिए खुलती है जो ११-१२ घंटे में काजा पहुचाती है . काजा से ही कुछ दूरी पर दुनिया का सबसे उचाई पर बसा हुआ गांव है ( Khibber Village) .
काजा के आस पास के दर्शनीय स्थल - Kye Monastery, Chandratal Lake, Khibber Village,Lanza Village,Komic Monastery(the world’s highest motorable monastery at 4587 mts), Pin Valley National Park, Dhankar Monastery, Tabo Monastery
उनके द्वारा ली हुई कुछ तसवीरें


काजा शहर का दृश्य

स्पीति नदी

एक गांव

काजा शहर
स्पीति वैली के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए संजीव अंकल के एक दोस्त ने एक वेब साईट बनाई है http://www.incrediblespiti.com/ यहाँ स्पीति वैली के बारे में पूरी जानकारी ली जा सकती है .














12 comments:
Bahut achha laga spiti ke bare me jaan kar.
Madhav Ji, SPITI BHRAMAN ke liye bahut bahut dhanyavaad, tasveeren bahut sunder hai...
बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट है!
--
चित्र बहुत ही बढिया है!
--
आपकी पोस्ट को बाल चर्चा मंच में लिया गया है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/24.html
खूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है
badhiya jaankari bhi di hai
----------------------------------------
सचमुच, बहुत सुंदर तस्वीरें हैं!
उत्तराखंड के विद्यालयों में चलनेवाली
कक्षा सात की गणित की पुस्तक के पहले प्रश्न में
इस स्थान का उल्लेख है!
सरस चर्चा में इस पोस्ट का उल्लेख होगा ही!
----------------------------------------
काजा शहर नहीं भाई, काजा गांव। लाहौल स्पिति जिले में एक भी शहर नहीं है। हां, काजा मुख्यालय है। इसलिये काजा को कस्बा भी कह सकते है।
बहुत सुन्दर चित्र।
कितनी अच्छी अच्छी बातें बताई तुमने .....प्रकृति के ये विहंगम नज़ारे देख आनन्द आगया
ढ़ेर प्यार
अनुष्का
बहुत सुन्दर तस्वीरें हैं.
@ नीरज जाट जी
काजा की सरचना शहर जैसी ही है .भूगोल की परिभाषा से शहर की आबादी दस हजार से ऊपर होनी चाहिए और ७५ % आबादी गैर कृषी गत कार्य में होना चाहिए .
काजा की 90% आबादी कभी गैर कृषी गत कार्य में ही है , सो काजा को कहा जा सकता है
जब मैं १० साल का था, तब काज़ा गया था, आज भी याद है की वो कितना खूबसूरत था. heights अक्सर मनुष्य को आत्मबोध करवाती हैं.
Post a Comment