Friday, October 15, 2010

अलविदा शेरा


कल कामनवेल्थ गेम्स समाप्त हो गया . तीन अक्टूबर से शुरू खेलो का कुम्भ कल खत्म हो गया . मैंने भी तीन खेलो का मजा लिया , हॉकी , साइकलिंग और रग्बी . शेरा को मैंने खूब पसंद किया , उसके तसवीरें खिचाई . मेरे लिए इस कामन वेल्थ गेम्स की याद शेरा ही है जिसे मै काटू कहता हूँ.

Common Wealth Games: By Madhav's Eye view



शेरा (काटू) के साथ एक क्लिक



एक और



असली नायक पुरे 101


रग्बी सेवेन मैच का एक नजारा


पापा रग्बी देखने गए है या फोटो खिचाने !


आसमान में उड़ते पक्षियों (बाज) का राज क्या है ?

7 comments:

sada said...

माधव बहुत ही सुन्‍दर चित्र प्रस्‍तुति दी है आपने, बधाई के साथ शुभकामनायें ।

Akshita (Pakhi) said...

काटू के साथ तो माधव प्यारा लग रहा है...मजेदार.

Chinmayee said...

बढ़िया तसवीरें हैं !

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर माधब, यह बाज देख रहे हे कि इन नेताओ ने कुछ छॊडा भी हे इन के लिये की सब कुछ खा गये....
दुर्गाष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

राष्ट्रमणडल खेलों के सफल आयोजन की
हार्दिक बधाई देता हूँ!
मेरा भारत महान!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/23.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

राष्ट्रमणडल खेलों के सफल आयोजन की
हार्दिक बधाई देता हूँ!
मेरा भारत महान!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/23.html

honesty project democracy said...

अभी शेरा को अलबिदा नहीं कहा जा सकता अभी तो शेरा को उन परदे के पीछे के भ्रष्टाचार के खिलाडियों के खेल को उजागर करना है और उनको तिहार जेल के दंड समारोह में चक्की पिसवानी है असल समापन और विदा तो तब होगा इस गेम का ....स्टेडियम का दर्शकों से खाली रहना भी इस गेम की कुव्यवस्था को दर्शाता है ....आपने इस सच्चे चित्र को प्रकाशित कर सराहनीय कार्य किया है ....

 
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