Tuesday, April 13, 2010

ये क्या हो रहा है ?

तसवीरें में ध्यान दे , पैर की तरफ , जी हाँ जूते ! मेरे नहीं पापा के है, पर मैंने पहन रखे है. आज सुबह जब पापा ने शुज मांगे तो मैंने शुज लाया तो जरुर, पर खुद ही पहन लिया . ये मेरी पुरानी आदत है और दिन पर दिन बढ़ती जा रही है . पापा , मम्मी, मामा किसी के भी जूते , चप्पल को अपना ही समझता हूँ और पहन लेता हूँ. मै जूतों , चप्पल का प्रेमी तो हूँ और कभी भी बिना जूते /चप्पल के नहीं रहता , पता नहीं , दूसरों के जूते , चप्पल पहन कुछ ज्यादा ही मजा आता है . आज सुबह भी यही हुआ , बस क्या था , पापा ने कुछ स्नैप ले लिए , आप देखे , कैसे है !








4 comments:

राइना said...

Jawab nahi....
ati uttam.

रावेंद्रकुमार रवि said...

चर्चा मंच पर
महक उठा मन
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

--
संपादक : सरस पायस

माधव said...

@ रावेंद्रकुमार रवि
माधव की चर्चा के लिए आभार. यहाँ मंच पर सभी दोस्तों से मिल पाते है , यहीं सबसे अच्छी बात है , आपको दुबारा धन्यवाद

माधव said...

@ राइना
धन्यवाद

 
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