Sunday, April 4, 2010

3 अप्रैल 2010, इंडिया गेट

शनिवार की शाम जब नींद से सोकर उठा तो मम्मी-पापा इंडिया गेट जाने का प्लान कर रहे थे ,प्लान बन गया और मै कपडे पहन कर तैयार . पापा मम्मी के साथ इंडिया गेट गया. वहां मेले जैसा माहौल था . खोमचे वालों की तो भरमार थी . गुब्बारें , खिलोनें , गोलगप्पे , चने , छोले और बहुत कुछ . मैंने इन सब में से एक गेंद की मांग की . मम्मी ने तुरन्त दस रूपये की एक गेंद खरीद कर मुझे दी और मै बस शुरू हो गया. मै नींद से उठकर इंडिया गेट आया था और ऊर्जा से भरपूर था तो जमकर खेल का मजा लिया , खूब खेला , दौड़ा और पापा को भी दौडाया , जो गेंद वहा खरीदी थी उसको फाड़ कर ही दम लिया . खेलने के बाद लिम्का की बोतल खुली और लेज का पैकेट . लिम्का पीया , चिप्स खाया और फिर शुरू हुआ खेल . मम्मी-पापा ने गोलगप्पे खाए.
फिर हम इंडिया गेट से वापस लौटे और डिनर करने एक रेस्टोरेंट में गए , डिनर किया और घर वापस .


1 comments:

सैयद | Syed said...

भैया ... अकेले अकेले दावत उड़ा रहे हो... :)

 
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