Monday, March 14, 2011

सातताल (Sattal)


ये हमारी यात्रा का सबसे सुंदर स्थल था . भीमताल से तीस किलों मीटर की दूरी पर स्थित सातताल दरअसल सात तालो (Seven Lakes) से मिलकर बना है इसलिए इसका नाम सातताल पड़ा . सभी तालो का नाम रामायण के पात्रो से लिए गए है जैसे कि राम ताल , लक्ष्मण ताल , भारत ताल , हनुमान ताल , गरुण ताल आदि .वैसे कुछ ताल में पानी केवल बरसात में होता है सो वे सुख गए थे .

प्रकृति की गोद में बसा सातताल मानवीय गतिविधियो से अछूता है शायद इसीलिए यहाँ चारों ओर हरियाली और खूबसूरती बिखरी पडी है .नैनीताल और भीमताल की तरह यहाँ कोई मकान वगैरह नहीं है .यहाँ पहुचते ही शीतल हवाओं ने हमारे शरीर को छुआ , सारे थकान दूर हो गयी . सुदूर घाटी में बना ये ताल बहुत खूबसूरत है .

यहाँ बहुत कम लोग दिखाई दिए , अमूमन लोग नैनीताल , भीमताल देखकर ही लौट जाते है . मेरे लिए कुमाऊ हिमालय का सबसे खूबसूरत ताल यही है, शांत , सुरम्य , हरियाली से भरपूर .
आप अगर कुआऊ क्षेत्र में आये तो सात ताल जरुर देखे .




दूर पहाड़ी से सात ताल ऐसी दिखती है






माधव ने सात ताल में तैर रहे बतखो को बिस्कुट खिलाया

मै अपने आप को झील में उतरने से रोक नहीं पाया , कपडे होते तो नहाता जरुर


माधव पत्थर खोज रहा है झील में फेंकने के लिए

माधव ने भीमताल की तरह यहाँ भी ताल में खूब पत्थर फेंके

यह भी एक ताल ही है जो सुख गया है , ये YMCA का क्रिकेट मैदान बन गया है





5 comments:

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर फोटो..

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, अबे माधब यार नहाले इस ताल मे, हम सब आंखे बन्द कर के तुझे देख लेगे:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...
This comment has been removed by the author.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
कुमाऊँ के तालों का बहुत आनन्द ले रहे हो!

Udan Tashtari said...

सुन्दर सुन्दर!!!

 
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