Wednesday, June 30, 2010

कभी खुशी कभी गम

विडियो देखने के बाद ही पता चलेगा की शीर्षक ऐसा क्यों है !

10 comments:

M VERMA said...

कभी खुशी कभी गम
रूदन भी तो जरूरी है

Udan Tashtari said...

हा हा! समझ गये शीर्षक!!

रंजन said...

अर्र्रे.. बच्चु... सो सेड.. मस्त रहो...

प्यार..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आ गया समझ मे राज!

राज भाटिय़ा said...

अबे बच्चू आंसू तो एक भी नही आया??? इतनी जोर से रो रहा है या एक्टिंग कर रहा है???

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सही कहा नन्हें दोस्त।
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किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?

vicharmanch said...

आपको शुभकामनाएं , स्नेह और आशीर्वाद माधव ..
और हाँ,

प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

कुमार राधारमण said...

बच्चे हंसते हुए ही अच्छे लगते हैं।

शिक्षामित्र said...

हम न चाहें,तब भी दुख घेर ही लेते हैं। इसलिए कम से कम अपनी ओर से तो कोशिश नहीं करनी चाहिए रूलाने की-और वह भी बच्चों को।

anilpandey said...

wah bhaaee wah .

 
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