Friday, June 25, 2010

खुशी का लम्हा : मेरे घर आई एक नन्ही परी


आज सुबह सुबह ही हमें एक बहुत ही अच्छी खुशखबरी मिली . मेरी बुआ घर में एक नन्ही परी लेकर आई है . आज सुबह आठ बजे आरा में उसका जन्म हुआ . नन्ही परी बुआ जैसी ही सुन्दर है. दादी ने फोन पर बताया की नन्ही परी "पुतरी" जैसी है . खबर सुनकर पापा बहुत खुश हुवे , मम्मी भी खुश थी , पर मम्मी बेटा एक्स्पेक्ट कर रही थी . फिर पापा ने मम्मी को बताया आज के दौर में बेटा बेटी सब एक सामान है , महिला शसक्तीकरण का दौर चल रहा है .


अब इस खुशी के लम्हे को सेलेब्रेट करने की बात आई . पापा ने शाम को मेरठ वाले की दूकान पर चल कर इमरती खाने का प्रोग्राम बनाया . आज सुबह से ही दिल्ली का मौसम खुशनुमा है , सुबह में बारिस भी हुई .

तो प्लान के अनुसार हम शाम को आठ बजे मेरठ वाले ( मुखर्जी नगर ) की दूकान पर गए और इमरती खाई . गर्म -गर्म रसदार इमरती खाकर मजा आ गया , मीठा खाने के बाद अब कुछ नमकीन खाने का दिल हुआ, मम्मी , मामा और मैंने गोल गप्पे खाए और पापा ने गोल गप्पे का पानी किया . फिर हम घर वापस आ गए , रास्ते में कई काटू मिले , जिन्हें मैंने बाय- बाय कर दिया .









यही बनती है ये इमरती

देसी घी की इमरती

ये मेरे मामा है










(25 जून,2010 को देसी घी से बनी इमरती का मूल्य २४० रूपये किलो है . जलेबी २०० रूपये किलो है . १५ रूपये में पांच गोलगप्पे मिलते है .)

29 comments:

राज भाटिय़ा said...

बच्चे बहुत बहुत बधाई, ओर यार अब हमे भी तो खिलाओ ना इस मेरठ वाले की मीठी मीठी मिठाई अजी जलेबी ही खिला दो मुझे तो बहुत स्वाद लगती है ना, ओर यह काटू तुझे दिल्ली मै कहा मिल गये?

सुलभ § Sulabh said...

बहुत बहुत बधाई माधव !

इमारती तुमने खाई मजा मुझे भी खूब आया.

शुभम जैन said...

areee wah bahut bahut badhai...aur ek baat batau hum bhi ara ke hi hai...agali baar ara chalo saath me chalte hai :)

शुभम जैन said...
This comment has been removed by the author.
Divya said...

Bahut achhi khushkhabri di Madhav,
Badhaii ho aap sabhi ko.

imartee khilane ka shukriya

माधव said...

@ शुभम जैन

बहुत खुशी हुई जानकार की आप भी आरा से है . पहली बार आभासी दुनिया में कोई मेरे शहर का मिला है . मेरे पापा जैन कॉलेज आरा से ही पढ़े हुवे है.
और आपने सही कहा , कभी साथ ही आरा चलते है . आप दिल्ली आ जाना यही से चलेंगे

rashmi ravija said...

छोटी गुड़िया के घर आने की बहुत बहुत बधाई..तुम्हें तो एक प्यारी सी बहन मिल गयी...अरे वाह तुम तो भैया बन गए...अब 'काटू' से मत डरना :)
इमरती और गोल गप्पे ने तो मुहँ में पानी ला दिया....बहुत ही मजेदार पोस्ट

शुभम जैन said...

areee madhav tum delhi se ara aao hum mumbai se aate hai wahi milege...fir bada maza aayega...saath me dher sari shaitani karege hai na...aur ishita to ab tumhe bahut achche se pahchan gyi hai foto dekhte hi kahti hia ye madhav hai tum bhi use apna fren bana lo jaldi okk :)

सुमित प्रताप सिंह said...

nice post...

mridula pradhan said...

achchi lagi baaten.

सत्य गौतम said...

जय भीम

समवेत स्वर/Samvet Swar said...

हाय क्यूट क्यूट कान्हा, माघव का दुसरा नाम तो ये भी है न? क्यूट-क्यूट पूरा ब्लॉग देख डाला, सोचा, और पहले क्यूं नहीं दिखा ये कान्हा। अकेले-अकेले मम्मी पापा के साथ जाकर मुंह मीठा कर लिया। वैसे मुझे मीठा ज़्यादा पसंद नहीं, मुझे नमकीन भिजवा देना। वाह कान्हा, दूध दही छोड़कर गोलगप्पे चखते हो।

Akhtar Khan Akela said...

maadv ji aaj to hm bhuke rh gye or munh men paani aa rhaa he hmen bhi aapki rs bhri jlebi or mithaaiyan khaanaaa he plz khilaaoge naa aapki rchnaayen unke laffaaaz or prstutikaran khubsurt hen. akhtar khan akela kota rajsthan

Akhtar Khan Akela said...

bhaai maadh ji ghlti ho gyi maafi chaahtaa hun.

दीनदयाल शर्मा said...

इमरती....!!!!! मुहँ में पानी आ गया...

पंकज मिश्रा said...

बहुत अच्छा डियर। ब्लॉग पढ़कर मुझे भी खुशी हुई। पापा ने मम्मी को बहुत अच्छी जानकारी दी। बहुत अच्छा। मेरी तरफ से बुआ को शुभकामनाएं देना। बहुत अच्छा।

Akshita (Pakhi) said...

बधाई हो माधव..अब तो तुम भैया बन गए. इमरती भी मजेदार..खूब रही.

रचना दीक्षित said...

मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार. आशा करती हूँ कि नन्ही परी अपने साथ खुशियों का पिटारा ले कर ही आई है और हाँ मैं इस समय बालूशाही खा रही हूँ.आया न मुंह में पानी !!!!!!

Voice Of The People said...

बड़े होने का एहसास और इमारती का मज़ा लाजवाब है.

डा.सुभाष राय said...

madhavjee, aap se kya kahun, imarati dekh kar to munh men pani aa gaya. par kya karoon, kaheen nlkalana padega, imarati na sahi kuchh meetha ho jay. aap ke blag par kahan likhun kahan chhod doon samajh men nahin aata. sab majedar hai.

अभिलाषा said...

क्या इमरती है..लाजवाब.

हिमान्शु मोहन said...

माधव! प्रभु! आपसे नया कुछ सुने बहुत दिन हो गए थे - सो इधर आया तो क्या देखता हूँ कि इमरती! और मज़ा मिलेगा सोचता हुआ आगे बढ़ा तो क्या देखता हूँ कि बड़े-बड़े काटू!
भाई आप के ब्लॉग का नया हेडर तो बहुत सुन्दर है, हमारी भी बधाई।

हिमान्शु मोहन said...

और छोटी परी के लिए भी बहुत-बहुत बधाई हो माधव!

Voice Of The People said...

अमन का पैग़ाम
यह अमन का पैग़ाम है जिसको ले के आप सब आगे बढें.
एकदम नया और अद्भुत ब्लॉग संकलक बनकर तैयार है।
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दीर्घतमा said...

वह माधव जी आप जैसे ही मिठाई भी है.
धन्यवाद

KK Yadava said...

Congts...!!

Atmaram Sharma said...

माधव जी मुंह में पानी आ गया है. इमरती की मिठास आपकी लिखावट में समा गई है. बधाई हो.

Arvind Mishra said...

आले वाह ई तो बहुत खुशी की बात है मेरी बधाई औल इमलती तो मियाँ अपने जौनपुर की मशहूर है ...बेनीराम की इमरती !

Indrani said...

Very tempting! :)

 
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