Monday, January 11, 2010

क्रिकेट


एक दिन छत पर पापा , विकी चाचा और कुछ और लोग क्रिकेट खेल रहे थे . मै भी पहुच गया , खेलने के लिए , व्यस्त खिलाड़ियों ने मुझ पर ध्यान नहीं दिया और मुझे किसी टीम में जगह नहीं मिली . मै बारहवे खिलाड़ी की तरह हो गया , पर मुझे ये कहाँ बर्दास्त था मै तेंदुलकर हूँ न की दिनेश कार्तिक . सो मैंने विद्रोह कर दिया और बीच पीच पे आकर धरना दे दिया . लोगो ने हटाने की कोशीश की पर मै नहीं हटा , खुटा गाड़ कर खडा हो गया पीच पर , जब जबरदस्ती की गई तो रोने लगा , और जबरदस्ती करने पर आवाज और तेज़ हो गई . मेरे असहयोग आन्दोलन का फल ये हुआ की मैच के बीच ब्याव्धान पड़ने के कारण खेल स्थगित करना पडा .






असहयोग आन्दोलन


आख़िरी रास्ता : मांगे मनवाने का

5 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सही...हमको भी खिलाओ नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे की निति भी ठीक ही है महाराज!! लगे रहो!!

I am what I am said...
This comment has been removed by the author.
I am what I am said...

mostly all of us did same when we were kid....reminded me old days when i was kid..good madhav..donot let them play if they are not giving u due respect in team:-)

shanti said...

madhaw g iagta ha gandhi giri abhi se pasand ha tabhi to abhi se jut gye ashyog andolan karmne me

shanti said...

madhaw g iagta ha gandhi giri abhi se pasand ha tabhi to abhi se jut gye ashyog andolan karmne me

 
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