Saturday, January 2, 2010

रोलर कोस्टर ड्राइव ऑन गेहूं

दिल्ली में हम आटा खरीद कर खाते है , पर यहाँ आरा में आटा खरीदना शिकायत की बात है, यहाँ तो गेहूं को बीन कर , धोकर , सुखाकर , चक्की में पीसाकर आटा बनता है . तो एक दिन छत पर गेहूं धोकर पसारा हुआ था , मै भी छत पर ही खेल रहा था , खेलते खेलते ही मै पसारे हुए गेहूं पर जा पहुचा , और गेहूं पर फिसलने का खेल खेलने लगा , उस समय छत पर निधी बुआ थी , उन्होंने मुझे रोकने के बजाय मेरी यह करामात दादीजी को बताई , दादी जी ने मेरी इस शरारत / बदमाशी को रोकने के लिए मना कर दिया और कहा मेरे पोते को छोड़ दिया जाय , हर शरारत करने के लिए . दादीजी और सभी मिलकर मेरी यह शरारत देखने लगे , कोई मुझे रोक नहीं रहा था सब मेरा गेहूं पर फिसलना देख रहे थे और मै इन सबसे अनजान अपनी ही धुन में गेहूं पर फिसलता रहा .



रोलर कोस्टर ड्राइव

रोलर कोस्टर ड्राइव


रही सही कसर झाड़ू से पूरी कर दी

मिशन कम्प्लीट

3 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

पहली बार मिल रहा हूँ आपसे..और मिलकर ख़ुशी हुई...बहुत ख़ुशी.

माधव said...

मिश्राजी , धन्यवाद आपका ,

संजय भास्कर said...

madav se mil kar sabko khushi hoti hai....

 
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