Tuesday, June 28, 2011

बक बक बक बक

पिछले दो महीने से मेरे स्कुल की छुट्टी है . मै दिन भर घर में रहता हूँ , अब तीन साल का बच्चा दिन भर घर में रहेगा तो शैतानी और उधम तो मचेगा ही ! तो बस आज कल मेरे बक बक से मम्मी परेशां है . दिन भर कुछ ना कुछ करता रहता हूँ . मम्मी से कुछ ना कुछ की फरमाइस होती रहती है . मेरे बक बक बोलने से मम्मी परेशां है . मेरे कुछ बक बक यु है

मम्मी टी वी देखना है
मम्मी क्मुट (कंप्यूटर ) में गेम खेलना है
चाय पीनी है
नमन के पास जाना है
पोटी करना है
सु सु करना है
खाना खाना है
बाहर जाना है
कुर कुरे खाना है
चाकलेट खाना है
पानी पीना है
कोल्ड ड्रिंक पीना है
घूमने जाना है
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8 comments:

ममता त्रिपाठी said...

माधव भई तुम तो सच में बहुत बक-बक करते हो। पर भई मैं तो यही सलाह दूँगी कि खूब बकबक करो यह तुम्हारा हक है, तुम्हारे बचपन का हक............जो एक बार खोने के बाद फिर चाहकर भी हम पा नही सकते । अतः तुम खूब बकबक करो।

पर केवल मम्मी से ही नहीं हम सब से भी.........
तुम्हारे नये बकबक की प्रतीक्षा रहेगी

वीना said...

क्या बात है बक-बक महाराज...अरे भई बचपन तो है ही इसलिए...
प्यारी-सी बकबक....
करते रहो यूं ही....

Mukesh Kumar Mishra said...

माधव तुम बकबक करो हमें अच्छा लगता है........

Kailash C Sharma said...

बचपन में बकबक नहीं करोगे तो कब करोगे..बच्चों की बक बक बहुत अच्छी लगती है..

रंजन (Ranjan) said...

कितना कम बोलते हो..

मस्त रहो...

रंजन (Ranjan) said...

खबरदार... कौन तुम्हारी बातों को बक बक कह रहा है... बताना मुझे जरा..

शुभम जैन said...

aur bolo khub bolo...abhi to mumma ki pareshani aur badhne wali hai jab tumhare ajibo garib Qs shuru hoge...

lekin yahi to bachpan hai...

khush raho...haste raho.

माधव( Madhav) said...

हौसलाअफजाई के लिए सभी ब्लोग्गेर्स का शुक्रिया

 
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