Thursday, June 9, 2011

गौरैया


आरा में मेरे घर में कई गौरैया ने अपना घोसला बनाया है . एक घोसला तो एक शीशे (ड्रेसिंग टेबल) के ठीक ऊपर था घोसलों में कई चूजे भी थी जो शोर मचाते थे . हमने इन मेहमानों का पूरा ध्यान भी रखा है , जिस शीशे (ड्रेसिंग टेबल) पर गौरैया ने घोसला बनाया है उसका प्रयोग बंद कर दिया गया है . गौरैया के टकराने के डर से पंखे भी नहीं चलाये जा रहे है .

मेरे लिए गौरैया काफी कौतुहल की चीज थी.


8 comments:

संजय भास्कर said...

bahut hi achi baat hai ye to

रावेंद्रकुमार रवि said...

इस कार्य की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है!--
मेरी समस्त शुभकामनाएँ आपके साथ हैं!

चैतन्य शर्मा said...

बहुत सुंदर गौरैया का घरोंदा ....

Akshita (Pakhi) said...

..अब तो इसके चूजों का इंतजार रहेगा.

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (11.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

संगीता पुरी said...

वाह माधव .. चूजों की पिक्‍चर भी दिखाना !!

Patali-The-Village said...

बहुत सुंदर गौरैया का घरोंदा|

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" said...

वाह माधव ..बहुत सुंदर . मेरी शुभकामनाएँ चूहेमल का देखो खेल

 
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