Monday, March 22, 2010

माधव इज बैक ( Madhav is Back)


तकरीबन दो महीने बाद मै आज ब्लॉग पर लौटा हूँ . ५ डिसेंबर २००९ से २० मार्च २०१० तक मै दादाजी /दादीजी (आरा)और नानाजी /नानीजी (बक्सर ) के साथ रहा और उनके प्यार के सानिध्य में पल्लवित होता रहा. मै अपनी बात पापा तक नहीं पहुचा पाया और पापा आप तक नहीं . फिर पापा के पास दिल्ली जाने का समय आ गया.


२० मार्च २०१० को हम आरा से दिल्ली के लिए रवाना हुवे , दादादी , दादीजी , गुडिया बुआ , वर्षा दीदी सबके सब उदास थे और आखे नाम थी . मै भी उदास था सबसे बिछड़ने का गम जो था . रेलवे स्टेशन पर पहुचे तो श्रमजीवी एक्सप्रेस एक घंटे लेट थी , खैर ट्रेन आयी और भागमभाग के बीच हम ट्रेन पर सवार हुवे , पल भर में ही ट्रेन ने आरा शहर को छोड़ दिया . सुबह हुई तो ट्रेन दिल्ली के करीब गाजिआबाद में थी और फिर दिल्ली. दिल्ली में ठंडी हवाओं ने गर्म हवाओं का रूप धारण कर लिया था, टी वी में समाचार आ रहा था की इस साल भीषण गर्मी पड़ने के आसार है ! घर में बहुत गन्दगी बिखरी पडी थी , पापा ने कुछ भी सहेज कर नहीं रखा था , फ्रिज में फफुद लगी थी , रजाई , कम्बल , स्वेटर वैसे ही रखे हुवे थी , कुछ पौधे हरे थे और कुछ सुख चुके है . मेरे दोस्त नमन और तनु का कुछ पता नहीं , वे भी अपने नानी के घर गए हुवे है . इन तीन महीनों में पापा ने अपना ख्याल भी नहीं रखा , बहुत दुबले पतले से लग रहे है , मम्मी के ना रहने से उन्हें खाने -पीने की बहुत प्रॉब्लम हुई . हाँ पापा इस बीच मसूरी और धनौल्टी घुमने गए अकेले -अकेले .

अब अपने बारे में बताता हूँ , मै अब दो साल दो महीने का हो चुका हूँ , लंबाई बढ़ गयी है , बोलना सीख चुका हूँ , दिल्ली को दिलो बोलता हूँ . चप्पल से कुछ ख़ास प्यार पनपा है , बिना चप्पल के पैर जमीन पर नहीं रखता हूँ , दिन भर चप्पल -चप्पल बोलता रहता हूँ . पापा मुझे देखकर बहुत खुश होते है , गोद में उठाते है पर मै भाग जाता हूँ. पानी खूब पीता हूँ , टाफी ( Toffy) , कुरकुरे , बिस्कुट खाना बहुत अच्छा लगता है . मेरे खिलोनों का स्टोक भी बढ़ गया है , नए खिलौने ऐड हुवे है , एक बड़ा सा बैट भी मिला है . कपड़ो के मामले में तो ये मेरा स्वर्णकाल ही है , तीन महीनों में कम से कम तीस -चालीस नए कपडे खरीदे गए मेरे लिए . दो कुर्सियां खरीदी गयी . मकर संक्रांती , होली का जमकर लुत्फ़ लिया मैंने . राघव भइया से नयी दोस्ती भी हुई . मै कुछ बोल्ड हुआ और डरना कम हो गया है .


अगले कुछ दिन तक मै इन दो तीन महीनो की स्पेसल बातें आप तक पहुंचाउंगा.

3 comments:

संजय भास्कर said...

welcome back madav ji

संजय भास्कर said...

swagat hai aapka

नीरज मुसाफिर जाट said...

अरे भाई,
हम तो सोचे थे कि माधव कहां गुम हो गया?

 
Copyright © माधव. All rights reserved.
Blogger template created by Templates Block Designed by Santhosh
Distribution by New Blogger Templates