Friday, February 4, 2011

संतरे और मौसम्मी

ठण्ड धीरे धीरे उतर रहा है . शरीर से स्वेटर का भार हर दिन कुछ कम होता जा रहा है . टोपी और दस्ताने अगले साल के लिए साफ़ होकर रख दिए गए है . जाड़े का मौसम जा रहा है .


जाड़े से सबसे जयादा नुक्सान मेरे पौधों को हुआ है , कडाके की ठण्ड और पाले की वजह से करीब दस गमले सुख गए और बाकी पौधे भी धुप के बिना बीमार लग रहे है . हां संतरे और मौसम्मी के पोधो में फल आया हुआ है और संतरे तो पक भी गए है . संतरे के फल देखने में बहुत सुंदर लगते है . मेरा दोस्त नमन जब भी मेरे घर आता है , संतरे तोड़ने की कोशीश करता है .








9 comments:

Vijai Mathur said...

अभी यह बदलता मौसम है,थोड़ी सर्दी की एहतियात रख लो.
संतरे खाओ फायदे के हैं.

Akshita (Pakhi) said...

वाह...मुंह में पानी आ गया...

कविता रावत said...

वाह! इत्ते अछे संतरे! अरे हमरे पड़ोस में आपका घर होता तो मैं भी तोड़ने की कोशिश करती ..अब चोरी न कहना इसे बस्स!!

रावेंद्रकुमार रवि said...

देखने में तो सचमुच बहुत सुंदर लग रहे हैं!

Patali-The-Village said...

वाह! इतने अच्छे संतरे! देख कर मुंह में पानी आ गया|

राज भाटिय़ा said...

अरे माधब हमे भी भेज दे यार ५०, ६० किलो संतरे:) अगले साल तेरे पोधे नही सुखेगे बेटा, सर्दियो मे उन्हे बरमादे मे या किसी रोशनी वाले कमरे मै रख देना, ओर जब सर्दी बढने लगे तो उस पर मोम जामा ( पलास्टिक की चादर)्थोडी मोटी वाली डाल देना, ओर पानी सप्ताह मे एक बार देना, फ़िर नही सुखेगे तेरे गमले या अन्य पो॑धे

सैयद | Syed said...

विजय सर की बात पर अमल करना भाई :)

माधव( Madhav) said...

thanx to all for comments

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

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