ये टर्टल है , ये मेरी नानी बक्सर से मेरे लिए लाइ थी . बहुत सुन्दर है ये खिलौना . पहली बार जब इसे देखा तो थोड़ा डर सा लगा था . टर्टल की गर्दन हिल रही थी , पूंछ भी घूम रही थी , साथ ही साथ उसकी पीठ पर एक डायनासोर भी बैठा था और वो भी हिल रहा था , पर धीरे धीरे डर जाता रहा और अब ये मेरा सबसे अच्छा खिलोना है .
कविता :- प्रयास करो तो ऐसा
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*कविता :- प्रयास करो तो ऐसा *
प्रयास करो, प्रयास करो....
जिन्दगी के लिए प्रयास करो,
कुछ करने के लिए प्रयास करो....
जिन्दगी में सुधर करने का, प्रयास करो,
कि...














9 comments:
अरे वाह, यह टर्टल तो वाकई बड़ा अच्छा है....
टर्टल अरे बाबा मुझे तो अभी भी डर लग रहा है.....
कितना बढिया है।
घूमता है तो बत्ती जलती है।
पहले डर लगा अब तो दोस्त है न..?
मुझे भी पसंद आया
बहुत ही सुन्दर ।
बालमन से डर निकल जाना ही अच्छा।
वाह वाह ... कीत्यना अच्छा खिलोना है ... दोस्त को भी खेलने देना इससे ...
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