Saturday, June 9, 2012

माधव और बुचिया

माधव की छुट्टियाँ का आनंद तीन गुना हो गया है . पिछले एक महीने से समर वैकेसन चल रहा था था पर माधव अकेले होने के कारण छुट्टियों का लुत्फ़ पूरी तरह नहीं ले पा रहे थे , पर ये समस्या अब दूर हो चुकी है . माधव की एक दीदी (वर्षा ) और एक छोटी बहन (खुशी ) (जिसे माधव "बुचिया "कहते है )बुआ के साथ दिल्ली आई है . माधव अपनी बुआ और दोनों बहनों को रिसीव करने रेलवे स्टेशन भी गए थे .  अब जनाब दिन भर दोनों बहनों के साथ खेलते है , दिल्ली भ्रमण  भी हो रहा है और छुट्टियाँ मजे  से कट रही है
























2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

सदा said...

बहुत ही बढि़या।

कल 13/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


'' छोटे बच्‍चों की बड़ी दुनिया ''

 
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