कल जब मै शाम को सो रहा था तब मम्मी और पापा बिना मुझे लिए बाहर चले गए , बाजार करने के लिए , कमला नगर . उस वक्त मै सो रहा था वरना ये संभव नहीं था की मेरे सामने मम्मी पापा मुझे बिना लिए घर से बाहर चले जाए. जब मै सोकर उठा तो कवक मामा घर पर थे , मम्मी को न पाकर मै रोने लगा तब मामा मुझे बाहर घुमाने ले गए . मम्मी और पापा आठ बजे शौपिंग करके घर आये , मम्मी मेरे लिए खिलौना लाई. टैंक अपने आप चलने वाला टैंक . आप भी टैंक को देख सकते है . ये टैंक गोली/ बारूद नहीं छोड़ता, बल्कि ये मेरे लिए मुस्कान लाता है , मेरा मुस्कान वाला टैंक
कविता :- प्रयास करो तो ऐसा
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*कविता :- प्रयास करो तो ऐसा *
प्रयास करो, प्रयास करो....
जिन्दगी के लिए प्रयास करो,
कुछ करने के लिए प्रयास करो....
जिन्दगी में सुधर करने का, प्रयास करो,
कि...














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