Tuesday, July 31, 2012

दिल्ली डेयरडेविल्स




Monday, July 9, 2012

आज से स्कुल शुरू

Monday, July 2, 2012

दिल्ली सरकार का फरमान . स्कुल आठ जुलाई तक बंद

माधव का स्कुल Summer Vacation के बाद आज खुलने वाला था . पर  प्रचंड उच्च तापमान और असहय मौसमी माहौल (Due to High Temperature and Extreme Hot Weather Conditions In Delhi ) के चलते दिल्ली सरकार ने दिल्ली के स्कूलों को आठ जुलाई तक बंद रखने को कहा है . 

 पूरा समर वैकेसन हम कही गए नही, दिल्ली में ही थोड़ा बहुत भ्रमण किया . एक साथ इतनी छुट्टियों से  माधव भी बोर हो गया था और स्कुल जाने की बात कर रहा था . पर भीषण गर्मी के चलते स्कुल खुल नहीं पाया . 

स्कुल खुला नहीं ! अब पूरी ऊर्जा पापा -मम्मी को परेशान करने में लगा रखा है . कभी टीवी देखना है ! कभी कंप्यूटर ! रोटी ,सब्जी, दलिया , बादाम , दूध अच्छा नहीं लगता पर मैगी की प्लेट दो मिनट में साफ़ .दूध पीने को बोलना मतलब दुश्मनी !

खैर , शायद बचपन में हम सभी ऐसे ही थे , फिर माधव क्यों नहीं ? 
















माधव के  स्कुल के वेबसाइट से लिया गया नोटिस 

Sunday, June 24, 2012

पहला कम्प्युटर गेम : Monster Truck Challenge

माधव का कम्पूटर से याराना बढ़ता जा रहा है . पिछले पन्द्रह दिनों से कंप्यूटर गेम भी शुरू हो चुका है . Monster Truck Challenge नाम का एक गेम रोज चल रहा है . दो लेवल जीत चुके है,  आगे के लेवल कठिन है इसलिए मेरी मदद ली जाती है . 

लक्ष्य बहुत बड़ा है , इसी उम्र में IGI पर भी हाथ आजमा रहे है . प्रयास जारी है .....















Friday, June 22, 2012

यादों का कारवाँ

परसों माधव की बुआ(मेरी बहन ), वर्षा  और बुचिया वापस आरा लौट गयी . माधव के साथ साथ हम सभी उदास है . पिछले पन्द्रह दिन माधव के साथ साथ हमारे लिए भी बहुत अच्छा था . मैंने अपनी बहन के साथ कुछ वक्त साथ रहा .

नौकरी लगने के बाद पहली बार मैं अपनी बहन के साथ इतने दिन रहा .यह रिश्ता जीवन के विविध उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए भी एक गहरे, बहुत गहरे अहसास के साथ हमेशा ताजातरीन और जीवंत बना रहा . मन के किसी कच्चे कोने में बचपन से लेकर युवा होने तक की, स्कूल से लेकर बहन के बिदा होने तक की और एक-दूजे से लड़ने से लेकर एक-दूजे के लिए लड़ने तक की असंख्य स्मृतियाँ परत-दर-परत रखी होती है। बस, भाई-बहन के फुरसत में मिलने भर की देर है, यादों के शीतल छींटे पड़ते ही अतीत के केसरिया पन्नों से चंदन-बयार उठने लगती है। एक ऐसी सौंधी-सुगंधित सुवास जो मन के साथ-साथ पोर-पोर महका देती है। 


बहनें हमेशा भाई के प्रति स्नेह का वही भाव रखती हैं जो बचपन में उनमें रहता है। बहनें तो भाइयों की सलामती की, तरक्की की दुआ करती रहती है पर कई भाई ही अपना वचन भुला देते हैं। आज के भौतिकतावादी युग में जब सारे रिश्ते बेमानी हो रहे हैं, भाई-बहन का रिश्ता दोनों के लिए एक संबल बन सकता है।



































Monday, June 18, 2012

लक्की चाचू : मैट्रिक पास

माधव के एक छोटे चाचू है नाम है -लकी चाचू. उत्तर प्रदेश के सुदूर कोने में ,गंगा के किनारे बसे एक गांव बीरपुर (जनपद -गाजीपुर ) में रहते है , मस्त मौला सीधा सादा  जीवन. उम्र करीब उन्नीस साल . दो साल से मैट्रिक की परीक्षा में फेल हो रहे थे पर इस बार अखिलेश भैया के राज में मैट्रिक पास हो गए . करीब 85 %मार्क्स आये है . कमाल हो गया ! है ना !   

लकी चाचू  उर्फ अमित कुमार राय को मैट्रिक की परीक्षा पास करने पर बहुत बहुत वधाई .


बधाई कार्ड्स


लक्की चाचू के साथ माधव की एक तस्वीर 


Saturday, June 16, 2012

हैपी मील

कुछ चीजे अपने नाम के साथ सही न्याय (Justice)करती है . मैक्डोनल्ड का "हैपी मील" इसका एक अच्छा उदाहरण है. एक बर्गर , एक पैकेट फ्रेंच फ़्राइज , एक कोका कोला और एक सुन्दर समकालीन खिलोना . मैक्डोनल्ड के प्रोडक्ट बहुत सीमित है पर  लोकप्रिय है . मै करीब दस सालो से मैक्डोनल्ड  जा रहा हूं . इस फ़ूड रेस्तराँ में मुझे हर वर्ग के लोग दिखाई देते है . एक  छोटे  मध्यवर्गीय परिवार को इससे ज्यादा क्या चाहिए . बीबी  और बच्चा दोनों खुश . शायद इसीलिए इसे हैपी मील नाम दिया गया .


                                   अब माधव का बात करे . इनको  बर्गर बिलकुल पसंद नहीं है  , वावजूद माधव मैक्डोनल्ड की शॉप देखते ही अंदर चलने की जिद करते है .  करीब दो साल पहले , एक बार जब हम  मैक्डोनल्ड गए थे , हैपी मील का डब्बा  माधव ने ही खोला था , तो फ़ूड आइटम के साथ माधव को RIO मूवी का टॉय मिला था . उसी वक्त से माधव के दिमाग में ये बात बैठ गयी कि मैक्डोनल्ड  में जाने पर टॉय मिलता है .और तब से लेकर आज तक  मैक्डोनल्ड हैपी मील  की टॉय की हर सीरीज  माधव  के पास है .  अब तो मैक्डोनल्ड  की दूकान दिखते ही , माधव को बड़ी तेज भूख लगती है . डब्बे से टॉय निकालते समय माधव की उत्सुकता और चेहरे का हाव भाव देखते ही बनता  है . माधव बर्गर तो छूता भी नहीं है , हां फ्रेंच फ्राई टोमैटो केच अप से साथ चाव से खाते है .

इसी हफ्ते हम  मैक्डोनल्ड में गए थे . माधव हैपी मील से बहुत हैपी हुए . इस बार एक बदलाव और आया. पहले माधव रोनाल्ड मैक्डोनल्ड ( लाल बाल वाले आदमी )  से बहुत डरता था पर इस बार जनाब उसके गोद में बैठ कर फोटो खिचवा रहे थे . 























                                       








माधव के पास इक्कट्ठा कुछ  मैक्डोनल्ड  टॉय    

Saturday, June 9, 2012

माधव और बुचिया

माधव की छुट्टियाँ का आनंद तीन गुना हो गया है . पिछले एक महीने से समर वैकेसन चल रहा था था पर माधव अकेले होने के कारण छुट्टियों का लुत्फ़ पूरी तरह नहीं ले पा रहे थे , पर ये समस्या अब दूर हो चुकी है . माधव की एक दीदी (वर्षा ) और एक छोटी बहन (खुशी ) (जिसे माधव "बुचिया "कहते है )बुआ के साथ दिल्ली आई है . माधव अपनी बुआ और दोनों बहनों को रिसीव करने रेलवे स्टेशन भी गए थे .  अब जनाब दिन भर दोनों बहनों के साथ खेलते है , दिल्ली भ्रमण  भी हो रहा है और छुट्टियाँ मजे  से कट रही है . 
























Thursday, May 31, 2012

इट हैपेन्स वनली इन बचपन (It Happens only in BACHPAN)


पिछले रविवार को हम दिल्ली विश्वविदयालय ,कुलपति कार्यालय ,नोर्थ कैम्पस के पार्क  में गए थे . गर्मी के मौसम में भी वहा की हरियाली   देखकर दिल खुश हो जाता है . वैसे तो दिल्ली में हजारों  छोटे बड़े पार्क है पर ये पार्क मुझे सबसे सुंदर और शांत लगता है . पार्क की सुंदर देखभाल के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की जीतनी तारीफ़ की जाय कम  है .


अब बात करे माधव की . पार्क की हरियाली देखकर माधव बहुत  खुश हुए . पहले तो जी भर कर दौड़े , खेले कूदे . थकने के बाद हरी  घास पर बैठे तो लेट गए फिर लोटते लोटते  ही पार्क का एक चक्कर लगा लिया .
माधव को घास पर लोटता देख मैंने मन ही मन कहा -इट हैपेन्स वनली इन बचपन (It Happens only in BACHPAN) 






















                                                 कुलपति का कार्यालय 















Monday, May 28, 2012

समर वर्क @ रात बारह बजे

माधव की  Summer vacations चल रही है . इन दिनों दिल्ली में दिन में सूरज आग बरसा रहा है सो दिन में कही जाने का सवाल ही नहीं है . इसलिए जनाब दिन में अच्छी नींद लेते है . अब दिन में नींद लेने के बाद , रात में जल्दी नींद कहा आती है , फिर क्या ,रात बारह बजे समर  होम वर्क करने लगे . होम वर्क में मन ऐसा रमा कि उठने का नाम ही नहीं ले रहे थे , फिर जबरदस्ती लाईट आफ की गयी तब जाकर जनाब सोये .






















 
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