Monday, May 10, 2010

मदर डे: माँ के साथ


कल मदर डे था . कल मैंने मम्मी को परेशान नहीं किया ऐसा झूठ नहीं बोलूंगा, दरअसल कल भी मम्मी को खूब परेशान किया .रविवार का दिन था इसलिए पापा मुझे और मम्मी को लेकर घुमाने प्रगती मैदान गए , मई के महीने में भी मौसम अच्छा था , शायद मदर डे का प्रभाव था जो मौसम भी माँ की तरह शीतल हो गया था. वहां प्रगती मैदान में प्रोपर्टी एक्सपो लगा हुआ था . पापा तो प्रोपर्टी देखने लगे , मै मम्मी को परेशान करने लगा , कभी किसी स्टाल में घुस जाता , तो कभी दूर भाग कर नजरों से ओझल हो जाता , मम्मी को डर लग रहा था की भीड़ भाड़ में मै कही खो जाउंगा . पर इस बात की मुझे कहाँ फिक्र थी .प्रगती मैदान के हॉल न १५ में मैंने धूम मचा दी , थक कर मम्मी पापा को हॉल से बाहर ले लाई. हाल के बाहर पिज्जा हट की एक दूकान थी , पापा ने पेटीस और कोफी ली इस दौरान भी मै मम्मी को परेशान करता रहा .

मै करीब छ्ह महीने बाद प्रगती मैदान गया था . पिछली बार नवम्बर २००९ में जब अन्तराष्ट्रीय मेला लगा था तब मै मम्मी पापा और मामा के साथ यहाँ आया था . तब यहाँ की मानसरोवर झील में पानी था और वाटर fountain चल रहे थे , पर कल मानसरोवर झील सुखी हुई थी , पानी की एक बूंद भी नहीं थे तो वाटर fountain का क्या हाल होगा आप समझ ही गए होंगे .हाँ कौवे और कुत्ते जरुर थे वहां पर .हम सब थोड़ी देर तक प्रगती मैदान में ही घूमते रहे .

फिर पापा हमें लेकर पास में ही इंडिया गेट ले गए .वहां के पार्को में हरी घास को देखकर लग ही नहीं रहा था की मई का महीना चल रहा है , चारों तरफ हरियाली फ़ैली हुई थी . वहां रविवार होने के चलते खूब चहल पहल भी थी . मम्मी ने मुझेआइस क्रीम खरीद कर दिया , वहां पर मै खूब खेला .रात होने को आई . हम इंडिया गेट से रवाना हुवे , और वही पास में ही आन्ध्र भवन के कैंटीन में चले गए , साउथ इंडियन खाना खाया और फिर घर वापस और मदर डे को खुसी मन से विदा किया.





ये क्या? सार्वजनिक जगह पर धुम्रपान प्रतिबंधित है ! पर इन अंकल को शायद नहीं पता ?

यूनीटेक के स्टाल पर पापा के साथ


confused

नवम्बर २००९ में जब अन्तराष्ट्रीय मेला लगा था, तब की तस्वीर. कितना पानी है


आज का हाल ,पानी की एक बूंद भी नहीं , बिन पानी सब सुन


थक गया हूँ , माँ के अलावा कहा जा सकता हूँ



कैसी है मेरी तस्वीर

कैसी है मेरी तस्वीर

बैठने की मेरी मनपसंद जगह






18 comments:

समय चक्र said...

बढ़िया संस्मरण माधव जी ...

नरेश सोनी said...

कैसे हो बेटा माधव..।
अंकल को भूल गए।
हम आपको याद कर रहे थे। पर हमारे नवाब साहब को चोंट लग लगी। हफ्तेभर परेशान रहे।

खैर, बेटा मेरा मानना है कि मम्मी-पापा तो होते ही परेशान करने के लिए हैं। मेरा बेटा मानव भी मुझे खूब परेशान करता है। पर मम्मी-पापा जानते हैं कि बच्चे जितना परेशान करते हैं, उससे कहीं ज्यादा प्यार भी करते हैं।

संजय भास्‍कर said...

.........बेहतरीन

रावेंद्रकुमार रवि said...

इतने सारे बढ़िया-बढ़िया नज़ारे देखकर
तो मेरा भी मन ख़ुश हो गया!
--
आज ख़ुशी का दिन फिर आया!
जन्म-दिवस पर मिला : मुझे एक अनमोल उपहार!
मुझको सबसे अच्छा लगता : अपनी माँ का मुखड़ा!

Anonymous said...

I think this article not written by you because u r very small in age and how can u have that kind of understanding.

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sam said...

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thanks.

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golu said...

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सिम्प सिंग said...

बहुत ही बढ़िया आर्टिकल सर
धन्यवाद

Mp gk said...

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gollo said...

good aartical sir
thanks

History said...

Thanks

baba said...

Great aarticle
thanks

Madhu said...

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yanmaneee said...

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rahul said...

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rahul said...

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