Monday, January 3, 2011

नए साल का स्वागत इंडिया गेट पर

नए साल का आगाज बर्फीली हवाओं से हुआ . दिल्ली में ३० दिसंबर से ही ठण्ड में तेजी आ गयी है . एक जनवरी को हमारा प्लान इंडिया गेट जाकर पिकनिक मनाने का था , पर हमारा प्लान सूर्य देव की कृपा पर निर्भर था अगर धुप हुई तभी हम वहा जायेंगे . सूर्य देव मेहरबान हुए , ग्यारह बजते बजते खूब अच्छी धुप खिल गयी . मम्मी और नानी ने पिकनिक की तैयारी कर ली . कचोरी , मटर पनीर , पुलाव , आलू गोभी की सब्जी , गाजर का हलवा , लिम्का बगैरह बगैरह . इंडिया गेट पर अच्छी खासी भीड़ भाड थी. हमने अपना टेंट वही पार्क में लगाया और पिकनिक मनाई.मै वहाँ के हरे भरे पार्क में खूब खेला .







२०११ की पहली सुबह
































Saturday, January 1, 2011

नव वर्ष की शुभकामनाएँ (Happy New Year 2011)











Thursday, December 30, 2010

अलविदा २०१० ( कुछ भूली बिसरी यादें )

साल बीतने में अब कुछ घंटे ही बचे है . अपना तीसरा साल माधव और मेरे लिए काफी अहम रहा . इस साल माधव का मुंडन हुआ . माधव ने ठीक से बोलना शुरू किया . बहुत सारी यादें जुडी इस साल .इन सभी मीठी यादों को मैंने इस विडियो में समेटा है.इस साल और दशक की की ये आख़िरी पोस्ट है . कुछ ही घंटो में ये साल ही नहीं बल्कि इक्कीसवीं सदीं का पहला दशक भी समाप्त हो जाएगा . आने वाला साल और दशक माधव के लिए काफी अहम होगा .

तो अलविदा २०१० और इसकी यादो के साथ मै इस पोस्ट को आपके लिए छोड़े जाता हूँ .



Wednesday, December 29, 2010

पापा..पापा स्टोरी सुनाओ ( टू स्टोरी, )


यु ही एक रात माधव को एक स्टोरी सुनाने लगा . जंगल की स्टोरी , जिसमे एलीफैंट है , काउ है , टाइगर है .दरअसल स्टोरी थी ही नहीं मै तो बस बाते जोड़ जोड़ कर और बना बना कर आगे बोल रहा था पर खास बात ये कि जंगल की स्टोरी माधव को बहुत अच्छी लगी , उसने खूब ध्यान से सूनी . अब रोज रात को सोने से पहले माधव बोलता है पापा... पापा स्टोरी सुनाओ . एक नही.. टू स्टोरी. स्टोरी जंगल की ही होने चाहिए , यानी की शुरुआत ऐसे होनी चाहिए "एक जंगल था......". बिना जंगल के स्टोरी माधव को अच्छी नहीं लगती है .स्टोरी में बीच में माधव भी आ जाता है. एक दिन संता क्लाज की भी स्टोरी सुनाई थी , मैंने बताया कि संता क्लाज होर्स पर बैठ कर आता है और छोटे बच्चों को चोकलेट और खिलौने देता है . अब अगली सुबह मैंने माधव के जागने से पहले ही उसके तकिये के नीचे एक चोकलेट रख दिया , माधव नींद से जगा ,चाकलेट देख बहुत खुश हुआ पर ये भी पूछा की सांता क्लाज ने खिलोने क्यों नहीं दिए ?

अब बना बना कर कितनी कहानियां सुनाउंगा ,मेरा स्टोक खत्म हो गया है . लग रहा है कि किसी किताब से स्टोरी पढ़ कर सुनानी पड़ेगी .




मृत्युंजय कुमार राय


Tuesday, December 28, 2010

डी एल एफ प्लेस साकेत (DLF Saket)





26 दिसंबर को डी एल एफ प्लेस साकेत गया था . बहुत ही सुंदर और भव्य माल बनाया है डी एल एफ ने . कुछ झलकिया












Monday, December 27, 2010

क्रिसमस की तसवीरें(कनाट प्लेस में )

क्रिसमस से पहले नाना -नानी हमारे यहाँ दिल्ली आये है . बहुत मजा आ रहा है . क्रिसमस के दिन हम सब कनाट प्लेस गए थे . वहा बहुत भीड़ थी . कई जगह संता क्लाज खड़े मिले जो हम बच्चों को चोकलेट /टाफी दे रही थे. एक सांता मेरे पास भी आया , उसे देखकर मै बहुत डर गया और मेरी चीख निकल गयी . पर सांता ने मुझे टाफी दी. कुल मिला जुलाकर ये क्रिसमस बहुत मजेदार रहा .











Friday, December 24, 2010

हैप्पी क्रिसमस






Wednesday, December 22, 2010

पहला हेयर कट


माधव का मुंडन तीन सितम्बर २०१० को हुआ था . बाल तो अभी अभी थोड़े थोड़े ही बड़े हुए है पर साइड की कलम बड़ी हो गयी है . आरा में ही मै माधव को लेकर नाई की दूकान पर गया था पर माधव ने बाल नहीं कटाए . कुर्सी पर बैठते ही खूब जोर जोर से चिल्लाने लगा . उसका रौद्र रूप देख नाई की भी काटने की हिम्मत नहीं हुई , उसने मना कर दिया और बोला कि जब बच्चा थोड़ा और बड़ा हो जाए तब कटवा लेना.

खैर उसके बाद हम दिल्ली आ गए . दिल्ली में मै और माधव की मम्मी , माधव को लेकर बिग बॉस नामक एक सलून में गए . मगर जनाब वहाँ भी अकड गए , "मुझे बाल नहीं कटाना है " कह कर रोने लगा . मम्मी को लगा मेरा बेटा मेरी बात नहीं टालेगा, सो उन्होंने माधव को खूब फुसलाया , मनाया और आखिर में धमकाया भी , पर रिजल्ट शून्य रहा . मै माधव को लेकर बैरंग ( बिना बाल कटे ) घर आ गया . सोचा फिर कभी !

पर ११ दिसंबर, २०१० को माधव के मामा घर आये . माधव का अपने मामा से खूब पटती है . बातो बातो में माधव अपने मामा के साथ उसी सैलून में गया और बाल कटवा लिए . जब मामा -भांजा घर आये तो हम माधव के कटे बाल देख हैरान रह गए . सच ही कहा है बच्चा का दिल राजा का होता है , वही करता है जो उसका मन करता है .




बाल काटने से पहले


बाल काटने के बाद

Tuesday, December 21, 2010

डाबर च्यवनप्राश पोटी है !


सर्दी के मौसम में घर में सभी लोग आज कल च्यवनप्राश खाने लगे है . रात को खाना खाने के बाद एक चम्मच डाबर च्यवनप्राश , एक ग्लास दूध के साथ . मुझे ये च्यवनप्राश अच्छा नहीं लगता है सो मम्मी मुझे नहीं देती है . कल यु ही पापा जब च्यवनप्राश खा रहे थे तो उन्होंने मुझे भी खाने को कहा . मैंने फट से मना कर दिया और कहा कि ये तो पोटी है .सबकी हंसी फुट पडी .

Thursday, December 16, 2010

दो नए खिलौने


इस हफ्ते मेरे टॉय बैंक में दो नए खिलौने शामिल हुए . पहला खिलौना है ,एक लक्जरी कार. मम्मी के जन्म दिन ( 9 दिसंबर ) की शाम हम घूमने कनाट प्लेस गए थे . वही कोरीडोर में सजी एक पटरी की दूकान पर से पापा ने मेरे लिए एक ब्लू रंग की गाड़ी खरीदी. इस गाड़ी से इतना प्यार हुआ कि दो दिन तक मैंने इसे किसी को छूने भी नहीं दिया . सोते समय भी इस गाड़ी को साथ लेकर ही सोया . हद तो तब हो गयी , जब रात में नींद खुली तब भी कार के बारे में ही पूछ रहा था.





दुसरा खिलौना मेरी गुंजा बुआ ने दिया . ११ दिसंबर को बुआ, फूफाजी और अनुष हमारे घर आये थे . बुआ मेरे लिए एक चाइनीज पिस्टल( लेजर गन ) लाइ थी . मै भी बहुत दिन बाद अनुष से मिला . वो अब चलने लगा है और बहुत ही क्यूट लग रहा है . रंग तो इतना गोरा है कि अंग्रेज लगता है .



माधव और अनुष


अनुष
 
Copyright © माधव. All rights reserved.
Blogger template created by Templates Block Designed by Santhosh
Distribution by New Blogger Templates