
Wednesday, January 19, 2011
Tuesday, January 18, 2011
आज स्कुल का पहला दिन
१६ जनवरी २०१० को मै तीन साल का हो गया. १७ जनवरी को पापा ने मेरा एडमिसन डी ए वी नर्सरी स्कुल ,में करा दिया . कल ही मम्मी बाजार से मेरे लिए स्कुल बैग , लंच बॉक्स , पानी की बोतल आदि लाई . आज स्कुल में मेरा पहला दिन था. मम्मी ने सुबह जल्द उठा दिया .मै झटपट तैयार होकर बैग कंधे पर लटकाया, लंच बॉक्स ( बिस्कुट और मेरा फेवरिट नमकीन ) और पानी की बोतल गले में डाली और स्कुल जाने को तैयार . पापा -मम्मी मुझे ऐसे तैयार देखकर भावुक हो गए . चूजा पहली बार घोसले से बाहर उड़ान भरने जा रहा था .मै पहली बार उनके छत्रछाया से निकल कर दुनिया के बीच जा रहा था . मम्मी ,पापा और ईश्वर को प्रणाम कर मै मम्मी के साथ स्कुल पहुचा . मम्मी मुझे स्कुल छोड़ कर घर आ गयी. ११.१० मिनट पर स्कुल से मम्मी को फोन आया " माधव रो रहा है इसे ले जाओ ".
एक राज की बात , स्कुल में मैंने पैंट में ही शु शु कर दिया था , वहा की मैम ने फिर मेरी पैंट बदली .
स्कुल का पहला दिन कुछ यु ही मीठी यादों के बीच गुजर गया.

मेरी पहली पाठशाला
Monday, January 17, 2011
धन्यवाद'
कल मेरा जन्म दिन था . दिन भर शुभकामनाए मिलती रही . जिस किसी ने फ़ोन किया , सबने मुझसे बात करना चाहा . मैंने किसी से बात किया, किसी से नहीं, सब मुड पर निर्भर था . वैसे मकर संक्राती के दिन ही मेरा दोस्त नमन के चाचू का अकस्मात निधन हो गया . बहुत दुखद घटना थी , लक्की चाचू मुझे भी बहुत प्यार करते थे . भगवान उनकी आत्मा को शांति दे.
इस घटना के बाद पापा -मम्मी मेरा जन्म दिन मनाने का प्रोग्राम रद्द कर दिया .वैसे सुबह में मैंने नानी का खरीदा हुआ कपड़ा पहना. मामा ने उपहार में एक बस दिया और पापा ने एक कार .
पापा -मम्मी , मामा और मै मंदिर गए , वहा भगवान को प्रसाद चढाया और आशीर्वाद लिया .
कल इन लोगो ने मुझे जन्म दिन की शुभ कामनाए दी:
दादू -आरा से
बुआ -
वर्षा दीदी
ऋतू दीदी
अनीमा मौसी
नाना -नानी बक्सर से
पिताजी ,बड़ी मम्मी और राघव भैया नवानगर से
गुंजा बुआ -दिल्ली से
निधी बुआ -बीरपुर(गाजीपुर ) से
निशु बुआ -रामनगर ( वाराणसी ) से
निकू चाचू -आदमपुर (पंजाब ) से
इन लोगो के अलावा दिल्ली में बहुत से लोगो ने मुझे शुभकामनाए दी . ब्लॉग धरातल पर भी कई साथियो ने मुझे wish किया.
सभी लोगो को मेरा आभार और धन्यवाद

Sunday, January 16, 2011
Friday, January 14, 2011
Wednesday, January 12, 2011
दादी की गंगा सागर की धर्म यात्रा

मेरी दो दादीयाँ पिछले दिनों गंगा सागर की यात्रा पर निकली है. उनकी मंजिल मकर संक्रांती यानी १४ जनवरी को गंगा सागर पर दुबकी लगाने की है .गंगासागर पर उस दिन बहुत बड़ा मेला लगता है .यात्रा देवघर , गंगासागर , जगन्नाथपुरी, तिरुपती बालाजी , मद्रास . मदुरै , रामेश्वरम , कन्याकुमारी , नासिक ,उज्जैन , पुष्कर , मथुरा , चित्रकूट तक की है . मेरी दोनों दादी धर्म परायण है .मेरी इश्वर से प्रार्थना है कि ईश्वर उनकी इस धर्म यात्रा को सफल बनाएँ .

बड़ी दादी

छोटी दादी

Tuesday, January 11, 2011
मेड इन चाइना
कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी "चांदनी चौक टू चाइना". फिल्म में हीरो चांदनी चौक से चाइना जाता है . पता नहीं चांदनी चौक से चाइना कुछ जाता है या नहीं, पर चाइना से चांदनी चौक बहुत कुछ आता है . जहाँ तक बच्चों के खिलौनों का सवाल है , आप किसी भी दूकान में चले जाय सारे खिलोने पर मेड इन चाइना लिखा पायेंगे . इस चीज को देखकर कई सवाल मन में उठते है जैसे ,भारत में मेड इन इंडिया खिलौने क्यों नहीं मिल रहे है ? क्या खिलौने बनाने की कोई फैक्टरी हमारे देश में नहीं है ? दस रूपये से लेकर हजार रूपये तक के ये खिलोने चाइना से बन कर आ रहे है , क्या ये सारे खिलोने लीगल तरीके से इंडिया आते है ( मतलब सारे टैक्स और लेवी चुकाकर )या ये खिलौने तस्करी के जरिए भारत में आ रहे है ? जब हमारे देश में इतनी बेरोजगारी है तो सरकार इन खिलोनो पर प्रतिबन्ध क्यों नहीं लगाती है ? प्रतिबन्ध लगने से खिलोने हमारे देश में बनने लगेंगे जिससे रोजगार का सृजन होगा .वैश्वीकरण (Globalization) के दौर में पता नहीं मेरी ये सोच कितनी तार्किक और व्यवहारिक है , खुद मुझे पता नहीं !
ये सारे सवाल मेरे मन में तब आये जब मेरे बेटे(माधव) का एक दोस्त नमन कल मेरे घर आया था . उसने माधव का एक खिलोना लिया और पीछे लिखे हुए लाइन को पढ़ा "मेड इन चाइना " . ये बाते माधव ने सूनी और कल से ही" मेड इन चाइना"- "मेड इन चाइना" का रट्टा मार रहा है .माधव के पास लगभग सभी खिलोने "मेड इन चाइना " ही है , क्या करे "मेड इन इंडिया " टैग की बाजार में कुछ मिलता ही नहीं . हां एक लकड़ी की गाड़ी है जो उसके मामा शिमला से लाये थे वो मेड इन इंडिया है .कुछ और खिलोने है जो "मेड इन इंडिया" है पर वो अल्पसंख्यक की सूची है . बहुसंख्यक तो "मेड इन चाइना" ही है .
खैर माधव को इस बात से क्या मतलब ! उसे तो अपने सारे खिलोनो से बहुत प्यार है खासकर अपनी खिलोना कारों से .इन खिलोना कारों से माधव कितना प्यार करता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माधव हर रात अपने किसी ना किसी खिलौना कार को लेकर ही सोता है और सुबह जगते ही उसी के बारे में पूछता है .
आज भी सुबह माधव जगते ही हाथ में खिलोना कार ली और बोला, "मेड इन चाइना ".

Made in India

Made In China
Monday, January 10, 2011
पापा ...पापा... होल्ड हेक्दानाल्ड (Old Mcdolad) सुनना है !
हमारा टी वी कुछ दिनों से खराब पड़ा है . सैमसंग कंपनी में शिकायत डाली हुई है पर अभी तक कुछ खास कारवाई नहीं हुई है . टी वी खराब होने के चलते , कम्पूटर का जयादा स्तेमाल हो रहा है . मै कम्पूटर को क्मुट बोलता हूँ . अब दिन में old mcdolad song सुनता हूँ .
पापा घर पर होते है तो उनसे बोलता हूँ ,पापा ...पापा... होल्ड हेक्दानाल्ड (Old Mcdolad) सुनना है . पापा मेरी भाषा समझ नहीं पाते है, परेशान हो जाते है , फिर मम्मी मेरी बात का सही मतलब पापा को बताती है.
इस पोएम में बहुत सारे जानवर है जिन्हें देखकर मै बहुत खुश होता हूँ .
आप भी सुने , मजा आएगा .
Thursday, January 6, 2011
सर्द दिल्ली
आज कल दिल्ली जबरदस्त ठण्ड पड़ रही है .मम्मी पापा हमेशा मुझे स्वेटर से ढक कर रख रहे है .थर्मल , स्वेटर , मोजा , दस्ताने , टोपी ......

Wednesday, January 5, 2011
नाना -नानी
परसों नाना - नानी दिल्ली से बक्सर चले गए . ट्रेन तक छोड़ने मै भी गया था . "मै भी बक्सर जाउंगा" ये जुमला मै दस दिन से बोल रहा था . नानी ट्रेन में बैठी तो मुझे एक खिलौना दे कर फुसला दिया और मै बक्सर नहीं जा पाया . पर अब भी मै यही कह रहा हूँ "मै भी बक्सर जाउंगा". नाना -नानी दस बारह दिन हमारे साथ रहे . हमने खूब एन्जॉय किया . नाना अपनी आखोँ से मुझे डराते थे , फिर मै सॉरी बोल देता था .
नाना -नानी बक्सर चले गए , मुझे छोड़कर . फिर भी मै रोज बक्सर जाने की बात करता हूँ . नाना नानी की रोज याद आती है .


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